मुखपृष्ठ / पद्मशाली इतिहास

कमल, पद्म और बुनाई परंपरा

“पद्म” शब्द, कमल-तंतु की बुनाई से जुड़े तथ्य, “शाली” शब्द का अर्थ, दक्षिण भारत के बुनकर-नाम — इन्हें एक-एक करके देखने वाला अध्याय।

अध्याय (15)
  1. पद्मशाली कौन हैं?
  2. भावना ऋषि और पद्मशाली परंपरा
  3. उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक परंपरा
  4. कमल, पद्म और बुनाई परंपरा
  5. प्राचीन निवास-क्षेत्र और प्रवास
  6. आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु
  7. बुनाई उद्योग और सामाजिक योगदान
  8. राजवंशों के काल में पद्मशाली
  9. मंदिर, धर्म और संस्कृति
  10. सामाजिक संरचना, गोत्र, शाखाएँ
  11. शाप से जुड़ी परंपरा — अलग खंड
  12. औपनिवेशिक काल और दस्तावेज़
  13. आधुनिक काल के पद्मशाली
  14. विश्व भर में समुदाय का फैलाव
  15. उपसंहार
अध्याय 4

कमल, पद्म और बुनाई परंपरा

पद्मशाली नाम में दो शब्द हैं: पद्म और शाली। पहले शब्द का अर्थ स्पष्ट है; दूसरे शब्द की व्याख्या के कुछ तरीके हैं। यह अध्याय अलग-अलग दिखाता है कि क्या ज्ञात है, क्या परंपरा है और क्या अभी शोध का विषय है।

  • पुराण / कुलपुराण
  • जीवित सामुदायिक परंपरा
  • लिखित प्रमाण
  • जिसकी पुष्टि बाकी है

पद्म — कमल

पद्म का अर्थ है कमल। हिंदू परंपरा में कमल पवित्रता, दिव्यता और सृष्टि का प्रतीक माना जाता है। पद्मशाली कुलपुराण इस प्रतीक को बुनाई से जोड़ता है।

कमल-तंतु का कपड़ा — क्या यह सचमुच होता है?

कमल की डंडी के रेशे से धागा निकालकर कपड़ा बुनना आज भी मौजूद एक हस्तकला है। परंतु उसके अभिलेख दूसरे स्थानों से आते हैं।

शाली — बुनकर

“शाली” शब्द को समुदाय बुनकर के अर्थ में लेता है। तेलुगु बुनकर समुदायों के नामों में भी यह शब्द मिलता है।

दक्षिण भारत की बुनाई परंपराएँ एक-दूसरे के साथ

पद्मशाली कोई अकेला खड़ा समुदाय नहीं है; दक्षिण भारत में कई बुनकर समुदाय और नाम हैं। उनके साथ संबंध को इस साइट को सम्मान के साथ प्रस्तुत करना चाहिए।

  • अभिलेख है कि साले / सालिया तेलुगु बुनकरों के नाम हैं।
  • आंध्र प्रदेश की पिछड़ा वर्ग सूची में कई बुनकर-नाम हैं; कुछ शोध-लेख स्पष्ट करते हैं कि वे सब पद्मशाली नहीं हैं।
  • तमिलनाडु में बुनकर समुदाय कई हैं; हर एक का अपना इतिहास और अपनी परंपरा है।

इस अध्याय का सार

बातवर्ग
पद्म = कमलशब्दार्थ
भावना ऋषि ने कमल-तंतु से वस्त्र बुनाकुलपुराण
कमल-तंतु की बुनाई (इनले झील, मणिपुर)लिखित प्रमाण (दक्षिण भारत का अभिलेख नहीं)
साले, सालिया, जुलाय नामलिखित प्रमाण
“शाली” शब्द की व्युत्पत्तिजिसकी पुष्टि बाकी है
आज की बुनाई और वस्त्र-व्यापारजीवित परंपरा

अगला अध्याय

5. पद्मशालियों का प्राचीन निवास-क्षेत्र और प्रवास — आंध्र क्षेत्रों से अन्य स्थानों की ओर प्रवास के बारे में क्या ज्ञात है और क्या नहीं, यह हम देखेंगे।