मुखपृष्ठ / पद्मशाली इतिहास

औपनिवेशिक काल और दस्तावेज़

1909 के थर्स्टन अभिलेख से लेकर जनगणना और गज़ेटियर तक — लिखित रूप में दर्ज पुराने उल्लेख क्या कहते हैं, और उन्हें कैसे पढ़ना चाहिए।

अध्याय (15)
  1. पद्मशाली कौन हैं?
  2. भावना ऋषि और पद्मशाली परंपरा
  3. उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक परंपरा
  4. कमल, पद्म और बुनाई परंपरा
  5. प्राचीन निवास-क्षेत्र और प्रवास
  6. आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु
  7. बुनाई उद्योग और सामाजिक योगदान
  8. राजवंशों के काल में पद्मशाली
  9. मंदिर, धर्म और संस्कृति
  10. सामाजिक संरचना, गोत्र, शाखाएँ
  11. शाप से जुड़ी परंपरा — अलग खंड
  12. औपनिवेशिक काल और दस्तावेज़
  13. आधुनिक काल के पद्मशाली
  14. विश्व भर में समुदाय का फैलाव
  15. उपसंहार
अध्याय 12

औपनिवेशिक काल और दस्तावेज़

अब तक हमने अधिकतर पारंपरिक कथाएँ और इंटरनेट के अभिलेख देखे। इस अध्याय में हम पहली बार सौ वर्ष से भी पहले छपे एक प्रत्यक्ष मूल दस्तावेज़ को, उसमें जो लिखा है उसके आधार पर पढ़ते हैं। यह सार्वजनिक अधिकार-क्षेत्र (public domain) की पुस्तक है, इसलिए कोई भी मूल को पढ़कर जाँच सकता है।

  • कुलपुराण
  • जीवित सामुदायिक परंपरा
  • लिखित प्रमाण
  • जिसकी पुष्टि बाकी है

थर्स्टन – रंगाचारी की पुस्तक

“साले” लेख — थर्स्टन ने क्या दर्ज किया

तेलुगु बुनकरों पर “साले” लेख सी. हयवदन राव की दी हुई टिप्पणी के आधार पर लिखा गया था। उसकी मुख्य बातें:

1909 वाला कथा-रूप

बुनाई का विराम और भावना ऋषि की पूजा

1909 का अभिलेख और बाद की स्थिति

पुराने दस्तावेज़ों का मूल्य इस बात में है कि वे किसी एक काल की स्थिति को ठहराकर दिखाते हैं। उसे आज की परंपरा से मिलाकर देखने पर पता चलता है कि समुदाय समय के साथ कैसे बदला।

पहलू1909 का अभिलेख (थर्स्टन)बाद के / इंटरनेट अभिलेख
यज्ञोपवीतपद्मसाले नहीं पहनते थेकहा जाता है कि पद्मशाली पहनते हैं; महासभा के प्रयास (अध्याय 9, 11)
गोत्रएक ही गोत्र “मार्कंडेय”; घरानों के नाम विवाह-निषेध के लिए101 गोत्र (अध्याय 10)
भावना ऋषि की पत्नीभद्रावती (एक)कुछ अभिलेखों में प्रसन्नवती, भद्रावती (दो)
101 पुत्र100 पद्मसाले + 1 पट्टुसाले के पूर्वज101 गोत्रों के पूर्वज (अध्याय 2, 10)
पूजावेंकटेश्वर घर के देवता; भावना ऋषि जाति के देवता; ग्राम-देवतामार्कंडेश्वर, वेंकटेश्वर, पद्मावती (अध्याय 9)

दूसरी आवाज़ें भी हैं

अन्य औपनिवेशिक दस्तावेज़

मूल को पढ़ने के लिए

“पद्मसाले” लेख इसी पुस्तक में अलग से है; उसका पूरा पाठ सीधे पढ़कर यहाँ की टिप्पणियों की पुष्टि करनी है।

खोजने योग्य अन्य दस्तावेज़

  • मद्रास प्रेसीडेंसी की हर दशक की जनगणना रिपोर्टें (1871 से)।
  • ज़िला-पुस्तिकाएँ और गज़ेटियर (उत्तर आर्काट, सेलम, चिंगलपेट आदि)।
  • बारामहल अभिलेख (Baramahal Records) और उनमें बुनकरों के उल्लेख।
  • “Varuna Darpanam” (1907) जैसी तेलुगु जाति-पुस्तकें।
  • परिवारों के पास रखे पुराने भूमि-दस्तावेज़ और व्यापार के बही-खाते।

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13. आधुनिक काल के पद्मशाली — शिक्षा, व्यवसाय, राजनीति, संघ, आज की चुनौतियाँ।