अध्याय (15)
- पद्मशाली कौन हैं?
- भावना ऋषि और पद्मशाली परंपरा
- उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक परंपरा
- कमल, पद्म और बुनाई परंपरा
- प्राचीन निवास-क्षेत्र और प्रवास
- आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु
- बुनाई उद्योग और सामाजिक योगदान
- राजवंशों के काल में पद्मशाली
- मंदिर, धर्म और संस्कृति
- सामाजिक संरचना, गोत्र, शाखाएँ
- शाप से जुड़ी परंपरा — अलग खंड
- औपनिवेशिक काल और दस्तावेज़
- आधुनिक काल के पद्मशाली
- विश्व भर में समुदाय का फैलाव
- उपसंहार
उपसंहार — परंपरा से भविष्य की ओर
आरंभ में हमने कहा था कि पद्मशाली इतिहास को एक ही कथा के रूप में नहीं, कई परतों के रूप में देखना चाहिए। अंत में हम एक साथ देखते हैं कि वे परतें कहाँ मज़बूती से खड़ी हैं और कहाँ अभी खुले प्रश्न बनी हुई हैं।
- कुलपुराण
- जीवित परंपरा
- लिखित प्रमाण
- खुला प्रश्न
जो हम निश्चित रूप से कह सकते हैं
जिन्हें कुलपुराण के रूप में रखा गया
खुले प्रश्न — संकलित सूची
हर अध्याय में जिन्हें “जिसकी पुष्टि बाकी है” कहा गया, उन्हें हमने एक ही स्थान पर रखा है। यही साइट के अगले शोध-कार्य हैं।
| अध्याय | क्या चाहिए |
|---|---|
| 2, 3 | कुलपुराण की प्रति; मार्कंडेय पुराण में भावना ऋषि वाला अंश है या नहीं; “पद्म वेद” का स्रोत |
| 2, 10, 11 | आठ शाखाओं और चार पीठों (पारंपरिक अभिलेख मौजूद है) के लिए ताड़पत्र, ताम्रपत्र, शिलालेख का स्रोत; पद्मभावाचार्य के काल का उल्लेख; “श्रीराम अग्रहार” कौन-सा गाँव है |
| 4 | “शाली” शब्द की भाषावैज्ञानिक व्युत्पत्ति; दक्षिण भारत में कमल-तंतु की बुनाई का कोई पुराना अभिलेख है या नहीं |
| 5 | सातवाहन और चोल काल में आगमन के दावों के लिए मूल शिलालेख; कांचीपुरम की “सालियर गली” का स्रोत |
| 6, 13, 14 | तमिलनाडु, कर्नाटक और पूरे भारत के लिए विश्वसनीय संख्या; विदेशों में फैलाव |
| 7, 8 | उत्तम चोल के ताम्रपत्र का मूल स्रोत; “सालियर” पद्मशाली ही थे या नहीं; काकतीय शिलालेख (Epigraphia Telanganica) |
| 9 | भावनारायण मंदिरों और समुदाय के बीच संबंध; कुलदेवता, पूजा के दिन |
| 10 | मुखपृष्ठ की सूची का वास्तविक स्रोत खोजकर जाँचना (शोध-प्रबंध TH12178 कोने लिंगय्या का वस्त्र-कला पर शोध है); तमिल लिप्यंतरण की पुष्टि; मार्कंडेय (102वाँ) गोत्र और 1909 के “एक ही गोत्र” वाले अभिलेख से उसका संबंध; कपड़े के प्रकार के अनुसार उप-शाखाएँ |
| 11 | तात आचार्य, पट्टाभि रामस्वामी और महासभा के काल के उल्लेख |
| 12 | अलग “पद्मसाले” लेख का पूरा पाठ; अन्य जनगणना और गज़ेटियर अभिलेख |
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आगे के कार्य
- जिस भी बात की पुष्टि बाकी है, उसके लिए मूल ग्रंथ को सीधे देखकर पुष्टि करना (उपयोग किए गए स्रोत: संदर्भ ग्रंथों का पृष्ठ)।
- गाँव-वार सामुदायिक दस्तावेज़: बस्तियाँ, मंदिर, संघ।
- मौखिक इतिहास का अभिलेख: बड़ों के साक्षात्कार।
- रामानुज और श्रीवैष्णव परंपरा तथा मणवाल मामुनि से जुड़े भाग (जिन्हें आरंभ में अलग रखा गया था) आवश्यकता होने पर अलग से जोड़ना।
- तमिल और तेलुगु भाषाओं में पूरे पृष्ठ।
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यहाँ दी गई किसी भी जानकारी में कोई त्रुटि, भिन्नता या अतिरिक्त जानकारी आपके पास हो तो हमें बताइए। कुलपुराण की प्रतियाँ, पुरानी पांडुलिपियाँ, पारिवारिक परंपराएँ और गाँवों के इतिहास बहुत मूल्यवान हैं। स्रोत और अनुमति के साथ भेजना सहायक होगा।
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