मुखपृष्ठ / पद्मशाली इतिहास

सामाजिक संरचना, गोत्र और शाखाएँ

घराने का नाम, गोत्र, संप्रदाय, व्यवसाय के प्रकार, संघ — समुदाय की भीतरी संरचना को उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर क्रम से रखने वाला अध्याय।

अध्याय (15)
  1. पद्मशाली कौन हैं?
  2. भावना ऋषि और पद्मशाली परंपरा
  3. उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक परंपरा
  4. कमल, पद्म और बुनाई परंपरा
  5. प्राचीन निवास-क्षेत्र और प्रवास
  6. आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु
  7. बुनाई उद्योग और सामाजिक योगदान
  8. राजवंशों के काल में पद्मशाली
  9. मंदिर, धर्म और संस्कृति
  10. सामाजिक संरचना, गोत्र, शाखाएँ
  11. शाप से जुड़ी परंपरा — अलग खंड
  12. औपनिवेशिक काल और दस्तावेज़
  13. आधुनिक काल के पद्मशाली
  14. विश्व भर में समुदाय का फैलाव
  15. उपसंहार
अध्याय 10

सामाजिक संरचना, गोत्र और शाखाएँ

पद्मशाली समुदाय की भीतरी संरचना को चार परतों में देखा जा सकता है: घराने का नाम (इंटिपेरु), गोत्र, संप्रदाय (शैव/वैष्णव) और व्यवसाय का प्रकार, तथा अंत में सामुदायिक संगठन। इस अध्याय के गोत्र, आठ शाखाओं और चार पीठों वाले भाग इस साइट के मुखपृष्ठ पर दी गई जानकारी से मेल खाते हुए रखे गए हैं।

  • पुराण
  • जीवित सामुदायिक परंपरा
  • लिखित प्रमाण
  • जिसकी पुष्टि बाकी है

गोत्र क्या है?

गोत्र वह पहचान है जिससे कोई परिवार अपने पितृ-वंश को किसी ऋषि से जोड़ता है। सामान्यतः हिंदू समुदायों में गोत्र पिता से संतान को मिलता है; एक ही गोत्र के लोगों के बीच विवाह सामान्यतः नहीं किया जाता। अभिलेख बताते हैं कि पद्मशाली समुदाय में भी गोत्र विवाह को व्यवस्थित करने में काम आते हैं।

मार्कंडेय गोत्र — 102वाँ?

101 गोत्रों की सूची — मुखपृष्ठ का संकलन

101 गोत्र (तालिका खोलने के लिए)
संख्यागोत्र (हिंदी)English (शोध-प्रबंध की वर्तनी)
1पौरुष ऋषिPowrusha Rushi
2दक्ष ऋषिDhaksha Rushi
3वालखिल्य ऋषिVaalakhilya Rushi
4वसिष्ठ ऋषिVashista Rushi
5वृक्ष ऋषिVruksha Rushi
6बृहती ऋषिBruhathi Rushi
7दारुक ऋषिDharuka Rushi
8वनक ऋषिVanaka Rushi
9विश्व ऋषिViswa Rushi
10काश्यप ऋषिKashyapa Rushi
11कुत्स ऋषिKuthsa Rushi
12मौय्य ऋषिMowyaa Rushi
13पावन ऋषिPavana Rushi
14वैशीन ऋषिVysheena Rushi
15जमदग्नि ऋषिJamadhagni Rushi
16मांडव्य ऋषिMaandavya Rushi
17यदु ऋषिYadu Rushi
18कशील ऋषिKasheela Rushi
19त्रिशंकु ऋषिThrishanka Rushi
20दुर्वास ऋषिDurvaasa Rushi
21जटिल ऋषिJatila Rushi
22वेदमात ऋषिVedamatha Rushi
23विदु ऋषिVidu Rushi
24भरत ऋषिBharatha Rushi
25वुर्वदास ऋषिVurvdasa Rushi
26उपेंद्र ऋषिUpendra Rushi
27वनजल ऋषिVanajala Rushi
28अंबरीष ऋषिAmbharisa Rushi
29धनंजय ऋषिDhananjaya Rushi
30मधु ऋषिMadhu Rushi
31च्यवन ऋषिChyavana Rushi
32भिक्षु ऋषिBhikshu Rushi
33पशुनक ऋषिPashunaka Rushi
34कौंडिल्य ऋषिKowndilya Rushi
35सत्यकर्म ऋषिSatyakarma Rushi
36तक्ष ऋषिThaksha Rushi
37प्रवृक्ष ऋषिPravruksha Rushi
38रुरुक्ष ऋषिRuruksha Rushi
39पुरु ऋषिPuru Rushi
40पुलस्त्य ऋषिPulastya Rushi
41सदु ऋषिSadu Rushi
42गार्गेय ऋषिGargeya Rushi
43कपिल ऋषिKapila Rushi
44संस्थित ऋषिSamsthita Rushi
45त्रिहु ऋषिThrihu Rushi
46निश्चित ऋषिNishchitha Rushi
47सुरक्ष ऋषिSuraksha Rushi
48पृथ्वी ऋषिPrudhvī Rushi
49पौंड्रक ऋषिPowndraka Rushi
50उदयपावन ऋषिUdayapavana Rushi
51कौशिक ऋषिKowshika Rushi
52ब्रह्म ऋषिBrahma Rushi
53मनुह ऋषिManuha Rushi
54जुरील ऋषिJureela Rushi
55कमंडल ऋषिKamandala Rushi
56आत्रेय ऋषिAatreya Rushi
57ऋष्यशृंग ऋषिRushyashrunga Rushi
58दिग्वास ऋषिDigvasa Rushi
59पुराशन ऋषिPuraashana Rushi
60वनसंज्ञक ऋषिVanasamjnaka Rushi
61सिंधु ऋषिSindhu Rushi
62पौष्णल ऋषिPowshnala Rushi
63रोणक ऋषिRonaka Rushi
64रघु ऋषिRaghu Rushi
65तुष्ट ऋषिThusta Rushi
66आश्रम ऋषिAasrama Rushi
67भार्गव ऋषिBhargava Rushi
68सुभिक्ष ऋषिSubhiksha Rushi
69चोक्रील ऋषिChokreela Rushi
70आंगीरस ऋषिAngeerasa Rushi
71भरद्वाज ऋषिBharadvaja Rushi
72प्रस्त ऋषिPrasta Rushi
73कंडिल ऋषिKandila Rushi
74वैदृत ऋषिVydrutha Rushi
75सपिल्वक ऋषिSapilvaka Rushi
76सुतीष्ण सूर्य ऋषिSutheeshna surya Rushi
77चंद्र ऋषिChandra Rushi
78शुक ऋषिShuka Rushi
79शौनक ऋषिShownaka Rushi
80मारीच ऋषिMaareecha Rushi
81नियंत ऋषिNiyantha Rushi
82सूत्र ऋषिSutra Rushi
83तृष्ण ऋषिThrushna Rushi
84शांडिल्य ऋषिShandilya Rushi
85पुण्यव ऋषिPunyava Rushi
86स्त्रंश ऋषिSthramsha Rushi
87सुकीर्त ऋषिSukeertha Rushi
88वाच्विन ऋषिVaachvin Rushi
89मनस्वी ऋषिManasvi Rushi
90अगस्य ऋषिAgasya Rushi
91धेनुक ऋषिDhenuka Rushi
92पुत्त ऋषिPuttha Rushi
93व्यास ऋषिVyaasa Rushi
94गुह ऋषिGuha Rushi
95अत्रि ऋषिAthri Rushi
96पराशर ऋषिParasara Rushi
97गौतम ऋषिGowthama Rushi
98प्रांचीव ऋषिPrancheeva Rushi
99ऊर्जेश्वर ऋषिUrjeeshvara Rushi
100स्वयंभु ऋषिSwayambu Rushi
101नारद ऋषिNarada Rushi

तिरुपति संघ के संकलन से तुलना

तिरुपति पद्मशाली सेवा संघम ने अपने वेब-पृष्ठ पर “श्री पद्मशाली वंशवृक्ष” नाम के वंश-वृक्ष से संकलित 101 गोत्रों की एक और सूची भी प्रकाशित की है (इस अध्याय के पिछले रूप में यही थी)। दोनों सूचियाँ अधिकतर एक जैसी हैं; अंतर तीन प्रकार के हैं — लिप्यंतरण, कुछ स्थानों पर क्रम, और कुछ नाम।

संख्यामुखपृष्ठ की सूचीतिरुपति संघ का संकलनप्रकार
21, 54जटिल (21), जुरील (54)जरिल (21), जटिल (54)नाम समान, स्थान बदला हुआ
51, 73कौशिक (51), कंडिल (73)कौंडिल (51), कौशिक (73)नाम समान, स्थान बदला हुआ
19त्रिशंकुत्रितंकनाम में अंतर
27वनजलवनतोलवर्तनी में अंतर
91धेनुकधेमकवर्तनी में अंतर
99ऊर्जेश्वरउद्देश्वरनाम में अंतर

घराना–गोत्र फ़ाइल: व्यवहार में मिलने वाले गोत्र

मेरी गिनती में जो मिला

  • फ़ाइल में 185 प्रकार की वर्तनियाँ हैं। स्पष्ट वर्तनी-भेदों को मिला दें (जैसे Dhaksha/Daksha, Bhaaratha/Bharatha) तो लगभग 166 अलग नाम आते हैं। यानी व्यवहार में 101 की संख्या ज्यों की त्यों नहीं दिखती।
  • 166 में से लगभग 100 नाम ऊपर की 101 की सूची के नामों से मेल खाते हैं या मिलते-जुलते हैं; शेष लगभग 66 नामों का सीधा मेल नहीं है।
  • 101 की सूची के कुछ नामों (जैसे सुरक्ष, पृथ्वी, पुण्यव, नारद) से मिलता नाम फ़ाइल में नहीं मिला।
  • “जाबालि” नाम इस फ़ाइल में नहीं है।
  • दक्ष (Dhaksha) और तक्ष (Thaksha) अलग नामों के रूप में ही आते हैं: Dhaksha 163 पंक्तियाँ (Daksha के साथ 171), Thaksha 2 पंक्तियाँ।

सबसे अधिक मिलने वाले 25 गोत्र-नाम

गोत्र (हिंदी)English (फ़ाइल के अनुसार)घराना-नाम की पंक्तियाँ101 की सूची में?
वसिष्ठVashishta343हाँ
मारीचMareecha268हाँ
काश्यपKashyapa234हाँ
भरद्वाजBharadwaja220हाँ
पवनPavana215हाँ
बृहस्पतिBruhaspathi195सीधा मेल नहीं*
पुलस्त्यPulasthya183हाँ
अंगीरसAngheerasa180हाँ
दक्षDhaksha / Daksha171हाँ
पराशरParaashara160हाँ
च्यवनChyavana160हाँ
कपिलKapila145हाँ
पुरुषोत्तमPurushothama142सीधा मेल नहीं*
अगस्त्यAgasthya138हाँ
अत्रिAthri135हाँ
भारतBhaaratha / Bharatha134हाँ
गालवGaalava130नहीं
कौंडिल्यKoundilya118हाँ
आत्रेयAathreya114हाँ
शुकShuka108हाँ
ऋष्यशृंगRushyashrunga106हाँ
कौशिकKoushika / Kaushika104हाँ
विश्वामित्रVishwamitra102नहीं
विक्रमVikrama102नहीं
गार्गेयGaargeya101हाँ

* बृहस्पति और पुरुषोत्तम 101 की सूची के “बृहती” और “पौरुष” जैसे नामों के वैकल्पिक रूप हो सकते हैं; इसकी पुष्टि नहीं हुई है। संख्या घराना-नाम की पंक्तियों की है, परिवारों की नहीं।

वे नाम जिनका 101 की सूची में सीधा मेल नहीं है, पर फ़ाइल में अधिक आते हैं

गोत्र (हिंदी)Englishपंक्तियाँ
कण्वKanva97
मैत्रेयMythreya95
श्रीवत्सShrivathsa / Srivathsa90
केशवKeshava86
पुलहPulaha83
कौंडिन्यसKoundinyasa79
कर्दमKardhama75
दत्तात्रेयDathathreya71
मधुसूदनMadhusudhana68
गोविंदGovindha66
क्रतुKrathuvu61
विजयVijaya60
विमलVimala55
जनार्दनJanardhana51
बृहदारण्यBruhadaaranya49
मुद्गलMudhgala45
हरितासHarithasa45
संकर्षणSankarshana44
ईश्वरEeshwara44
हृषीकेशHrushikesha43

घरानों के नाम (इंटिपेरु)

उप-शाखाएँ

आठ शाखाएँ (गण) और चार पीठ

संख्याशाखा (गण)गोत्र
1मार्कंडेय12
2भृगु13
3अगस्त्य14
4अंगिरस12
5कश्यप15
6वसिष्ठ14
7विश्वामित्र12
8भरद्वाज9
कुल101
संख्यापीठदिशापारंपरिक उल्लेख (स्थान)
1उत्तर पीठउत्तरवाराणसी / श्रीशैलम का उत्तरी तट
2दक्षिण पीठदक्षिणकांचीपुरम / तिरुवन्नामलै
3पूर्व पीठपूर्वद्वारका तिरुमला / राजमुंदरी
4पश्चिम पीठपश्चिमहम्पी / आलमपुर

सामुदायिक संगठन

एक नज़र में

बातवर्ग
101 गोत्र भावना ऋषि की वंश-परंपरा सेकुलपुराण
गोत्र से विवाह का व्यवस्थित होनाजीवित परंपरा
101 गोत्र-नाम (मुखपृष्ठ का संकलन, मुख्य)सामुदायिक संकलन (स्रोत पुष्ट नहीं)
तिरुपति संघ का संकलन (तुलना)सामुदायिक संकलन
101 + मार्कंडेय = 102 गोत्रसंघ का इतिहास-पृष्ठ; 1909 के अभिलेख से संबंध अनुमान है
शैव, वैष्णव संप्रदाय; व्यवसाय के प्रकार के नामसंघ का पृष्ठ, गणना तालिका
आठ शाखाएँ, चार पीठ (नामों के साथ)पारंपरिक अभिलेख (शोध के लिए संकलित; पुष्ट नहीं)

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11. पद्मशालियों को मिला बताया जाने वाला शाप — अलग खंड — पारंपरिक कथा, उसके कई रूप, और उसे सम्मान के साथ कैसे दर्ज किया जाए।